
पैरों के मोटे छालों को कैसे ठीक करें? होम्योपैथी डॉक्टर ने बताया तरीका
How to Treat Thick Blisters: क्या आपके पैरों पर फूले हुए और मोटे छाले हुए हैं? आइए डॉक्टर से जानते हैं ये क्यों होते हैं और कैसे ठीक किए जा सकते हैं।
होम्योपैथी एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसमें स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज की विचारधारा अलग मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से पूरी तरह से अलग है। होम्योपैथिक चिकित्सा के अनुसार शरीर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है और बीमारी से होने वाले लक्षण वास्तव में शरीर द्वारा फिर से स्वस्थ होने के लिए किया गया प्रयास है।
होम्योपैथी को होम्योपैथिक मेडिसिन भी कहा जाता है, जो एक विशेष चिकित्सा ज्ञान है। होम्योपैथिक चिकित्सा के अनुसार शरीर में खुद को ठीक करने की क्षमता होती है और इसमें बीमारी के लक्षणों को शरीर द्वारा फिर से स्वस्थ होने के लिए की गई प्रतिक्रियाएं समझा जाता है। इस चिकित्सा पद्धति में इलाज भी एक अलग विचार पर आधारित होता है, जिसे अंग्रेजी भाषा में “लाइक क्योर लाइक” कहा जाता है और हिन्दी में इसका मतलब “वही रोग वही इलाज” है। यदि सरल भाषा में कहें तो होम्योपैथी के अनुसार यदि किसी पदार्थ से एक स्वस्थ व्यक्ति में बीमारी के लक्षण होने लगते हैं, तो वही पदार्थ उसे थोड़ी सी मात्रा में देने पर वह ठीक हो सकता है।
होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के सिद्धांत के रूप में होम्योपैथिक दवाएं शरीर की अपने आप ठीक होने की क्षमता को बढ़ा देती है। होम्योपैथी के चिकित्सकों को होम्योपैथ कहा जाता है, जो नियमों के अनुसार पहले रोग का निदान करते हैं और फिर परिणामों के अनुसार दवाएं व अन्य उपचार थेरेपी निर्धारित करते है। इलाज के दौरान आमतौर पर मरीज को गोलियां व घोल दिए जाते हैं, जिन्हें एक निश्चित मात्रा में दवा के सक्रिय तत्व होते हैं। हालांकि, विज्ञान की तरफ से अभी तक कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिल पाया है, जिसमें होम्योपैथी दवाओं को किसी रोग के इलाज के लिए प्रभावी बताया गया हो।
होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति का जन्म 18वीं शताब्दी के अंत में हुआ था और इसके संस्थापक जर्मनी के चिकित्सक सैमुअल हैनिमैन को माना जाता है। होम्योपैथी शब्द ग्रीक के दो शब्दों “होमियोस” और “पैथोस” से मिलकर बना है। होमियोस का मतलब “एक समान” और पैथोस का मतलब “कष्ट” (या रोग) होता है, जो होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति के सिद्धांत “लॉ ऑफ सिमिलर” को दर्शाता है।
होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली का इस्तेमाल स्वास्थ्य को बनाए रखने और दीर्घकालिक रोगों का इलाज करने किया जाता है। होम्योपैथिक दवाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से एलर्जी, एटोपिक डर्मेटाइटिस, रूमेटाइड आर्थराइटिस और ईरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसे रोगों काइलाज करने के लिए किया जाता है। वहीं खरोंच या अन्य प्रकार की छोटी-मोटी चोटों का इलाज करने के लिए भी होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली को काफी फायदेमंद समझा जाता है।
हालांकि, कुछ गंभीर रोग हैं जिनका इलाज करने के लिए होम्योपैथी को उपयुक्त नहीं माना जाता है। इनमें मुख्य रूप से कैंसर, हृदय रोग, गंभीर संक्रमण और अन्य आपात स्वास्थ्य समस्याएं आदि शामिल हैं।
होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में न सिर्फ रोग का इलाज किया जाता है, बल्कि उसके कारण को जड़ से खत्म करके व्यक्ति को फिर से स्वस्थ भी किया जाता है। यदि सरल भाषा में कहें तो होम्योपैथी में न सिर्फ रोग का इलाज किया जाता है, बल्कि उसका कारण बनने वाली समस्याओं को ठीक करके जड़ से समस्या का समाधान किया जाता है। यही कारण है कि आज होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति का इस्तेमाल भारत, इंगलैंड और कई यूरोपिय देशों में व्यापक रूप से किया जाता है। होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभों में निम्न शामिल हैं -
होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली मे रोग के निदान की प्रक्रिया मॉडर्न डायग्नोसिस सिस्टम से थोड़ी अलग है। होम्योपैथी में रोग का निदान होमियोपैथ द्वारा किया जाता है, जिसमें रोगी के लक्षणों की जांच ही नहीं साथ ही साथ उसका समस्त शारीरिक परीक्षण किया जाता है। निदान के दौरान मरीज से उसके स्वास्थ्य संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनकी मदद से चिकित्सक रोग के प्रकार और उसका कारण बनने वाली स्थितियों का इलाज करते है। परीक्षण के दौरान मरीज की मानसिक स्थिति की जांच भी की जाती है, जिसके लिए उससे उसके जीवन की स्थिति, चिंता, भय, तनाव और अन्य मानसिक दबाव आदि के बारे में पूछा जाता है।
होम्योपैथिक चिकित्सा प्रणाली में रोग निदान की मदद से चिकित्सक मरीज के रोग व उसके कारण का पता लगाने के साथ-साथ उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति के बारे में भी जान लेते हैं। रोग निदान से प्राप्त परिणामों के अनुसार ही उचित इलाज निर्धारित किया जाता है। होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली में रोगों को चार अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में किया जाने वाला इलाज मॉडर्न मेडिसिन ट्रीटमेंट सिस्टम से काफी अलग है। एलोपैथिक दवाएं मुख्य रूप से रोग के लक्षणों को कम करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, वहीं होम्योपैथिक दवाओं की मदद से व्यक्ति के स्वास्थ्य को शक्ति प्रदान की जाती है ताकि व स्वयं रोग से लड़ सके। जैसा कि ऊपर बताया गया है होम्योपैथ सबसे पहले शरीर की बारीकी से जांच करते हैं, जिससे रोग के प्रकार व उसके कारण का पता लगाया जाता है। रोग के कारण के अनुसार होम्योपैथिक दवाएं व उनकी खुराक निर्धारित की जाती है, जो संबंधित रोग से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को शक्ति प्रदान करती हैं।
होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली में मरीज को रोगों से लड़ने की दवाओं के साथ-साथ उसे अन्य कई उपचार भी दिए जाते हैं जिसमें मानसिक रूप से सहारा प्रदान करना भी शामिल है। वर्तमान में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में कई सामान्य से गंभीर रोगों का इलाज संभव हो चुका है।
निम्न कुछ प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में बताया गया है, जिनके इलाज के लिए लोग विशेष रूप से होम्योपैथी की तरफ अपना रुख करते हैं -
होम्योपैथी लगभग 200 साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है और वर्तमान में दुनियाभर के कई हिस्सों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकतर मामलों में होम्योपैथिक दवाओं को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इसके उत्पादों से साइड इफेक्ट्स भी देखे गए हैं। होम्योपैथी के कुछ उत्पाद ऐसे भी हैं जिन्हें एलोपैथिक या अन्य उत्पादों के साथ नहीं लिया जा सकता है। अभी तक ऐसे कोई प्रमाण दर्ज नहीं किए गए हैं, जो होम्योपैथिक दवाओं को एलोपैथिक दवाओं से सुरक्षित बताते हों।
वहीं कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह मानना है कि होम्योपैथी दवाओं में सक्रिय पदार्थ बहुत ही कम मात्रा में होता है जिससे कोई इलाज होना लगभग असंभव है। हालांकि, आप इस बारे में सकारात्मक हैं इसलिए आपको आराम हो जाता है, जिसे एलोपैथिक में प्लेसिबो इफेक्ट कहा जाता है। हालांकि, अन्य विशेषज्ञ इसका समर्थन भी करते हैं और उनका मानना यह है कि होम्योपैथी दवाओं में मौजूद तत्व शारीरिक और मानसिक प्रभाव छोड़ने में प्रभावी होते हैं, जिससे आपका शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम हो जाता है।
गंभीर रोगों या इमरजेंसी स्थितियों का इलाज होम्योपैथी से करवाना खतरनाक हो सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि एलोपैथिक में अपेक्षाकृत अधिक आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

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हर साल 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। होम्योपैथी की नींव डॉ. सैम्युअल हैनीमैन ने 1796 में रखी थी, लेकिन भारतीय लोगों के जीवन से होम्योपैथी बहुत ही गहराई से जुड़ा हुआ है। आज भी हमारे देश में 3.45 लाख से ज्यादा पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक, 277 मेडिकल कॉलेज और 384 दवा GMP प्रमाणित कंपनियां हैं।

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अधिकतर लोग होम्योपैथी ट्रीटमेंट के बारे में जागरूक नहीं है। होम्योपैथी, पारंपरिक चिकित्सा से अलग एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। इसमें पौधों और खनिजों से दवाइयां बनाई जाती हैं। जानें, होम्योपैथी में किन बीमारियों का इलाज किया जा सकता है?

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