यूनानी एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसमें किसी भी रोग का इलाज करने के लिए मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को शक्तिशाली बनाया जाता है।
यूनानी चिकित्सा क्या है
यूनानी चिकित्सा एक प्राचीन उपचार प्रणाली है। एलोपैथिक ट्रीटमेंट सिस्टम के जन्म से पहले यूनानी दवाएं दुनियाभर में काफी प्रचलित थीं। हालांकि, अब भी विश्व के कई हिस्सों में यूनानी चिकित्सा को एक महत्वपूर्ण इलाज के रूप में स्थान दिया गया है। मेडिकल साइंस के विकास में भी यूनानी मेडिसिन का काफी योगदान रहा है। यूनानी चिकित्सा में आसपास की चीजों और वातावरण का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की पहचान की जाती है। बीमारियों का इलाज करने के साथ-साथ यूनानी चिकित्सा रोगों की रोकथाम करने और स्वास्थ्य में लगातार सुधार करने में भी काफी प्रभावी है।
एक प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक गैलेन (Galen) ने माना था कि प्रदूषकों से होने वाली अधिकतर बीमारियां हवा से फैलती हैं और इसी कारण से वे तेजी से फैल पाती हैं। वर्तमान यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोग के मानसिक, भावनात्मक, अध्यात्मिक और शारीरिक कारणों की खोज की जाती है। उनके अनुसार ये प्रदूषक हवा के माध्यम से हमारी श्वसन प्रणाली से होते हुए शरीर के अंदर पहुंचते हैं। यूनानी शास्त्रीय ज्ञान के अनुसार रोगों की रोकथाम करने और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने वाली दवाएं बेहद जरूरी हैं।
यदि सरल भाषा में कहा जाए तो यूनानी चिकित्सा में किसी रोग का इलाज करने के लिए मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता बढ़ाने और साथ ही लक्षणों को कम करने की दवाएं भी दी जाती हैं।
यूनानी चिकित्सा का इतिहास
यूनानी चिकित्सा प्रणाली का बुनियादी ज्ञान 980 ई. में फारस में हाकिम इब्न सिना (Hakim ibn sina) द्वारा एकत्र किया गया था। हाकिन इब्न सिना को अविसेना के नाम से भी जाना जाता था। इसके बाद 1868 में भारत में जन्मे अजमल खान ने भारत में यूनानी चिकित्सा के विकास और विस्तार में अपना योगदान और यूनानी चिकित्सा में अपनी पहचान दी।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली ने ग्रीस देश में जन्म लिया था। यूनानी चिकित्सा प्रणाली हिप्पोक्रेट्स और उसके अनुयायियों द्वारा चलाई गई थी। वर्तमान भारत, पाकिस्तान, पर्शिया और कई देशों में इस उपचार प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं साउथ अफ्रीका व इंगलैंड जैसे देशों में भी लोगों ने यूनानी चिकित्सा की तरफ रुख किया है।
यूनानी चिकित्सा के लाभ
यूनानी चिकित्सा प्रणाली स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान करती है और इसका उपयोग शरीर के सभी अंगों में होने वाले रोगों क इलाज करने के लिए किया जाता है। विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं में यूनानी चिकित्सा से मिलने वाले लाभ कुछ इस प्रकार हैं -
मुंहवचेहरेसेसंबंधितरोग - चेहरे व मुंह से संबंधित रोग दुनियाभर की काफी मुख्य स्वास्थ्य समस्या बन गए हैं। मुंह व चेहरे में आमतौर पर सूजन, लालिमा व संक्रमण संबंधी समस्याएं होती हैं। यूनानी दवाओं में एंटी-बैक्टीरियल (जीवाणुओं को रोकने वाली), एंटी-इंफ्लेमेट्री (सूजन कम करने वाली) और दर्द कम करने वाले गुण पाए जाते हैं। इन दवाओं की मदद चेहरे व मुंह संबंधी रोगों का इलाज किया जाता है। गलेमेंसंक्रमण - यूनानी चिकित्सा में जीवाणु-रोधी और संक्रमण रोकने वाली दवाएं तैयार की गई हैं, जिनकी मदद से संक्रमण आदि का प्रभावी रूप से इलाज किया जाता है। इन दवाओं की मदद से सूजन व दर्द आदि को ठीक किया जाता है।
जठरांत्रसंबंधीविकार - आजकल हर दूसरे व्यक्ति को पेट संबंधी कोई न कोई समस्या मिल ही जाती है और ऐसा आमतौर पर अस्वास्थ्यकर खान-पान की आदतों के कारण हो रहा है। वातावरण और बदलती जीवनशैली को देखते हुए हर यूनानी चिकित्सा प्रणाली में विभिन्न औषधिया मिलाकर दवाएं तैयार की गई, जिनकी मदद से पेट व आंत संबंधी सभी समस्याओं को ठीक किया जा सकता है। इन दवाओं की मदद से अपच, कब्ज, पेट फूलना, दस्त, डकार, उल्टी और उबकाई आने जैसी समस्याओं का इलाज किया जाता है।
मधुमेह - बिगड़ती जीवनशैली के कारण होने वाला मधुमेह रोग दुनिया के सामने एक मुख्य स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह एक मेटाबॉलिक विकार है, जो आमतौर पर शरीर में इन्सुलिन की कमी होने या पूरी तरह से अनुपस्थिति के कारण होते हैं। यूनानी दवाएं रक्त में शर्करा के स्तर को कम करती हैं, जिससे डायबिटीज के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। कुछ अध्ययनों के अनुसार यूनानी चिकित्सा प्रणाली में मधुमेह की दवांए विशेष जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती हैं, जो अग्नाशय में β कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। ये कोशिकाएं इंसुलिन का स्राव करती हैं, जिसे रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
गठिया - यूनानी चिकित्सा प्रणाली में गठिया समेत जोड़ों व हड्डियों से संबंधित अन्य रोग जैसे सूजन, लालिमा व अन्य समस्याओं आदि को “वजा-उल-मुफ्फासिल” के नाम से जाना जाता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली में गठिया व उपरोक्त अन्य रोगों का इलाज करने के लिए विशेष प्रकार की दवाओं व औषधियों को तैयार किया गया है। एक अध्ययन गठिया की कुछ यूनानी दवाओं का परीक्षण चूहों पर किया गया, जिनमें यह प्रमाणित हुआ कि ये दवाएं रूमेटाइड आर्थराइटिस का इलाज करने में प्रभावी है।
मोतियाबिंद - यह आंख संबंधी समस्या है, जिसमें आंख का ऊपरी लेंस धुंधला पड़ जाता है और इस कारण से उन्हें साफ दिखाई नहीं देता है। यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञों ने विशेष दवाओं का निर्माण किया कोहल-चिकनी दवा के नाम से जाना जाता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार यदि इस दवा का इस्तेमाल मोतियाबिंद पूरी तरह होने से पहले ही इस्तेमाल किया जाए, तो यह काफी प्रभावी रूप से काम कर सकती है। मोतियाबिंद की इस यूनानी दवा का इस्तेमाल चूहे पर करके कुछ अध्ययन किए गए, जिसमें इस दवा का सकारात्मक प्रभाव देखा गया। साथ ही इन अध्ययनों में यह भी पाया गया कि इन दवाओं से आंख पर कोई विषाक्त प्रभाव नहीं पड़ता है।
हृदयसंबंधीरोग - यूनानी चिकित्सा प्रणाली की मदद से हृदय संबंधी विकारों का इलाज भी किया जाता है। फारसी हाकिम इब्न सिना ने अपनी किताब “अदविया-ए-कलबियाह” में 63 अलग-अलग प्रकार की यूनानी दवाओं का वर्णन किया है, जिनका उपयोग हृदय विकारों का इलाज करने के लिए किया जा सकता है। इन सभी दवाओं में से मरीज के लिए कौन सी उचित है यह स्वास्थ्य व रोग के कारण को देखते हुए निर्धारित किया जाता है।
सांससंबंधीरोग - यूनानी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक विभिन्न दवाओं और तकनीकों की मदद से सांस संबंधी कई रोगों का इलाज करते हैं। कई यूनानी दवाएं हैं, जो बच्चों में वयस्कों में होने वाली घरघराहट, श्वासनली में होने वाली सूजन, नाक रुकना, गले में दर्द व सांस संबंधी समस्याओं का प्रभावी रूप से इलाज करती हैं। एक अध्ययन में यूनानी दवाओं से एक व्यक्ति के अस्थमा का सफलतापूर्वक इलाज किया गया था। इस व्यक्ति में अस्थमा के सिर्फ लक्षणों को ही ठीक नहीं किया गया था, वायुमार्गों की अतिसंवेदनशीलता को भी ठीक कर दिया था, जिससे अस्थमा की समस्या पूरी तरह से ठीक हो गई थी।
गुर्देकेविकार - यूनानी चिकित्सा पद्धति में गुर्दे संबंधी कई विकार ठीक करने का दावा भी किया जाता है। उदाहरण के लिए गुर्दे की पथरी का इलाज करने के लिए कई यूनानी दवाएं तैयार की जा चुकी हैं, जिन्हें भारत में भी काफी इस्तेमाल किया जा रहा है। एक केस रिपोर्ट के अनुसार एक्यूट किडनी इंजरी के एक मरीज का इलाज यूनानी दवाओं से सफलतापूर्वक किया गया था। वर्तमान में गुर्दे संबंधी कई बीमारियों के इलाज के लिए प्रमुख रूप से यूनानी चिकित्सा दवाओं का चुनाव किया जाने लगा है।
त्वचासंबंधीसमस्याएं - यूनानी चिकित्सक उपचार के विभिन्न तरीकों का उपयोग करके प्राचीन काल से त्वचा संबंधी कई समस्याओं का प्रभावी ढंग से इलाज करते रहे हैं। सोरायसिस व एक्जिमा आदि के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली यूनानी दवाएं त्वचा को नम रखती हैं और साथ ही इनमें सूजन व लालिमा कम करने वाले गुण भी होते हैं। त्वचा संबंधी बीमारियों का इलाज करने के लिए यूनानी दवाएं खाने और लगाने दोनों प्रकारों में उपलब्ध हैं।
मस्तिष्कविकार - यूनानी चिकित्सा प्रणाली के द्वारा मस्तिष्क संबंधी कई बीमारियों का इलाज काफी प्रभावी रूप से किया जाता है। मस्तिष्क का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अधिकतर यूनानी दवाएं प्राकृतिक सामग्री से बनती हैं, जिनमें मुख्य रूप से भारतीय तेजपत्ता, केसर और इलायची आदि शामिल हैं। इन दवाओं का अध्ययन चूहो पर किया गया, जिससे साबित हुआ कि ये दवाएं उम्र बढ़ने के साथ-साथ होने वाली मस्तिष्क की क्षति को कम करती है।
प्रजनन संबंधी विकार - यौन समस्याओं का इलाज करने में यूनानी चिकित्सा प्रणाली को दुनियाभर में काफी सराहा गया है। इसमें पुरुषों व महिलाओं दोनों में यौन क्षमताओं को बढ़ाकर बांझपन व अन्य यौन समस्याओं का इलाज किया जाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार यूनानी दवाओं में “विथान सोम्नीफेरा” नामक एक विशेष पौधे का इस्तेमाल किया जाता है, जो पुरुषों के वीर्य की गुणवत्ता को बढ़ाता है। साथ ही यूनानी चिकित्सा की यौन क्षमताओं की बढ़ाने वाली दवाएं प्रजनन हॉर्मोन को बढ़ाती हैं और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करती हैं।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली के सिद्धांत
ग्रीक मेडिसिन सिस्टम में स्वास्थ्य से संबंधित मुख्य सिद्धांतों का मूल्यांकन किया जाता है। इन कारकों को “अल-उमूर अल-तबियाह” के नाम से जाना जाता है, जिनका व्यक्ति के स्वास्थ्य से काफी करीबी संबंध होता है। इसीलिए, किसी व्यक्ति के रोग व उसके कारण का पता लगाने के लिए एक यूनानी चिकित्सक को इन सभी सिद्धांतों पर विचार करना पड़ता है। यूनानी चिकित्सा के मुख्य सिद्धांत कुछ इस प्रकार हैं -
पाचन - यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार पाचन प्रक्रिया के चार अलग-अलग चरण होते हैं। इसमें सबसे पहले पेट का पाचन और फिर आंत का पाचन शामिल होता है। इसके बाद भोजन कैम (Chyme) और कैल (Chyle) में बदल जाता है, जो लीवर में जाता है। पाचन प्रणाली की मुख्य चार स्टेज कुछ इस प्रकार हैं -
हेप्टिकडाइजेशन- इसमें कैल चार अलग-अलग ह्यूमर (रसिक्ता) में परिवर्तित हो जाता है, जिन्हें जिन्हें रक्त, कफ, पीला पित्त और काला पित्त कहा जाता है।
वेसलडाइजेशन - इसमें ऊतक अपनी आकर्षण शक्ति की मदद से पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं और धारण शक्ति की मदद से उन्हें बनाए रखते हैं।
टिश्यूडाइजेशन - यह पाचन की प्रक्रिया है, जो अन्य शक्तियों के साथ मिलकर ऊतक बनाने का काम करती है।
एक्सपल्सिवप्रोसेस - यह पाचन क्रिया का अंत हिस्सा माना जाता है, जिसमें बचे हुए अपशिष्ट पदार्थ को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
यूनानी चिकित्सकों के अनुसार जब पाचन प्रणाली के किसी भी चरण में कोई खराबी या कोई भी प्रक्रिया ठीक से काम न कर पाए तो विभिन्न प्रकार के रोग विकसित होने लगते हैं।
मानवशरीरकीस्थिति (हालतअल-जिस्म)- यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार मानव शरीर की स्थिति को तीन अलग-अलग शीर्षकों के साथ वर्गीकृत किया गया है, जिनमें निम्न शामिल हैं -
स्वास्थ्य - जिसमें शरीर के सभी कार्य व प्रक्रियाएं सामान्य रूप से काम करती हैं।
रोग - यह स्वास्थ्य से पूरी तरह से विपरीत होती है, जिसमें शरीर के एक या अधिक कार्य या फिर अंग काम करना बंद कर देते हैं।
नहीस्वास्थ्यऔरनहीरोग - यह उपरोक्त दोनों से विपरीत है, इसमें न तो व्यक्ति बीमार होता है और न ही पूरी तरह से स्वस्थ होता है। उदाहरण के रूप में बुजुर्ग व्यक्ति या वे लोग जो किसी रोग से ठीक होने के बाद फिर से स्वस्थ (रिकवर) हो रहे हैं।
शारीरिकस्वभाव (मिजाज़) - शरीर में मौजूद अलग-अलग तत्वों की आपस में होने वाली प्रक्रिया से विभिन्न शारीरिक अवस्थाएं उत्पन्न होती हैं। ये अवस्थाएं हर व्यक्ति के मिजाज़ (तबीयत) को दर्शाती है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली में किसी भी बीमारी के लिए उपचार निर्धारित करते समय मिजाज़ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक अलग स्वभाव होता है, जो संभावित रूप से वास्तविक सामान्य या असामान्य हो सकता है। वास्तव में एक वास्तविक समान स्थिति कभी नहीं होती है, बल्कि यह एक सैद्धांतिक स्थिति है जिसमें चार अलग-अलग तत्व एक साथ इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं एक असामान मिजाज़ आमतौर पर स्वभाव के अनुचित विस्तार से होता है।
आंतरिकशक्ति (कवा)- यूनानी मेडिसिन के अनुसार शक्तियां आमतौर पर तीन प्रकार की होती हैं, जिन्हें मानसिक (प्राकृतिक) शक्ति, पाचन शक्ति और प्रजनन शक्ति के नाम से जाना जाता है। ये तीनों शक्तियां कुछ इस प्रकार हैं -
मानसिकशक्ति - इसे तंत्रिका शक्ति या प्राकृतिक शक्ति भी कहा जाता है, जो मस्तिष्क में मौजूद होती है। मानसिक शक्ति आमतौर पर अवधारण शक्ति और प्रेरक शक्ति से मिलकर बनी होती है।
पाचनशक्ति - यह आंतरिक शक्ति का दूसरा प्रकार है, जो लिवर में मौजूद होती है और शरीर के हर ऊतक में सक्रिय रहती है। मेटाबॉलिज्म पावर आमतौर पर दो अलग-अलग शक्तियों द्वारा संचालित की जाती है, जिन्हें पोषक शक्ति और और वर्धमान शक्ति के नाम से जाना जाता है।
प्रजननशक्ति - यह आंतरिक शक्ति का तीसरा प्रकार है और उपरोक्त दोनों शक्तियों के जितना ही महत्वूर्ण है। प्रजनन शक्ति दो अलग-अलग शक्तियों से मिलकर बनती है, जिन्हें उत्पादक शक्ति और रचनात्मक शक्ति के नाम से जाना जाता है।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार आंतरिक शक्तियां शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिनकी मदद से जीवन का संतुलन बना रहता है। इनमें से कोई भी शक्ति प्रभावित होने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता है और कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या विकसित हो जाती है।
यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोग की रोकथाम
यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञों के अनुसार आसपास की चीजों और वातावरण का शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है, जिसके अनुसार ही हम स्वस्थ रहते हैं या बीमार पड़ जाते हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के विकसित होने से पहले ही उसकी रोकथाम करने के लिए इन स्थितियों पर विचार करना जरूरी होता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोगों की रोकथाम करना भी एक मुख्य सिद्धांत है, जो छह मुख्य व आवश्यक शर्तों पर काम करता है। ये आवश्यक शर्तें न सिर्फ रोगों की रोकथाम करने के लिए होती हैं, बल्कि शारीरिक संतुलन बनाए रखने और भोजन, पानी व हवा को प्रदूषण मुक्त रखने के रूप में भी काम करती हैं। इन आवश्यक शर्तों को यूनानी चिकित्सा पद्धति में “अल-असबाब अल सिताहो अल दरुरिया” के नाम से भी जाना जाता है, जिन्हें निम्न के अनुसार समझाया जाता है -
हवा (अल-हवा)
खाद्य व पेय पदार्थ (अल-माकूल वा अल-मशरूब)
शारीरिक व्यायाम और विश्राम करना (हरकत वा सुकून अल-बादेन)
मानसिक परिश्रम और आराम करना
नींद और जागते रहना
निकासी और अवधारण
यूनानी चिकित्सा पद्धति में रोग निदान
यूनानी चिकित्सा प्रणाली में इस्तेमाल की जा रही निदान प्रक्रिया मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम की डायग्नोस तकनीक से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार किसी भी रोग का इलाज करने, उसके लक्षणों को नियंत्रित करने या फिर उसे विकसित होने से रोकने के लिए उसका निदान करना जरूरी है। एक उचित निदान में मरीज के लक्षणों के साथ-साथ उसके स्वभाव और अन्य कोई कारकों की जांच भी की जाती है। ठीक आयुर्वेद की तरह यूनानी चिकित्सा प्रणाली भी मानव शरीर में मौजूद तत्वों के सिद्धांत पर आधारित है।
यूनानी चिकित्सक रोग निदान करने के दौरान शरीर की पूरी तरह से जांच की जाती है। इस दौरान मरीज से उसके लक्षणों, स्वभाव, भावनाओं और अन्य कई प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं, जो ठीक उसी तरह काम करता है जिस प्रकार मॉडर्न मेडिसिन डायग्नोसिस के दौरान सवाल पूछे जाते हैं।
यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ हिप्पोक्रेट्स द्वारा लिखी गई किताबों में रोग निदान संबंधी सभी जानकारियां दी गई हैं। इन किताबों की मदद से यूनानी चिकित्सकों को रोगों की पहचान करने, कारण का पता लगाने और उसके लिए उचित इलाज निर्धारित करने से संबंधित मार्गदर्शन मिलता है।
यूनानी चिकित्सा पद्धति में इलाज
यूनानी चिकित्सा को एक महान उपचार कला और विज्ञान माना जाता है। यह उपचार शरीर के समस्त अंगों को एक समूह के रूप में नहीं बल्कि एक ही अंग के रूप में मानता है। यूनानी चिकित्सा में किसी भी रोग का इलाज शरीर, मन और प्राणों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। यूनानी चिकित्सक जड़ी-बूटियों के विशेषज्ञ होते हैं, जो हर व्यक्ति के स्वास्थ्य और रोग के अनुसार दवाएं निर्धारित करते हैं। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार प्रकृति सबसे अच्छी उपचारक होती है। वैसे तो वर्तमान में इस प्रणाली की इलाज प्रक्रिया में काफी बदलाव हो चुके हैं, लेकिन फिर भी अधिकतर इलाज हिप्पोक्रेट्स की किताबों में दी गई जानकारियों के आधार पर ही होती हैं। इन किताबों में मुख्य रूप से निम्न उपचारों को आजतक भी इस्तेमाल में लाया जाता है -
छातीकेरोग - इसमें कफ को दूर करने के लिए जौ का सूप, सिरका और शहद से बनी दवाओं और घरेलू उपचारों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इनसे आराम न होने पर अन्य यूनानी दवाएं इस्तेमाल में लाई जाती हैं।
दर्द - इसमें पहले दर्द वाले हिस्से पर कपड़े को पानी से गीला करके रखा जाता है। मरीज के रोग व शारीरिक तासीर के अनुसार पानी को गर्म या ठंडा रखा जाता है। इस प्रक्रिया से आराम न मिलने पर प्रभावित हिस्से से कुछ रक्त निकाला जाता है। यूनानी विशेषज्ञों के अनुसार रक्त तब तक निकाला जाता है, जब तक रक्त का रंग चमकदार लाल न दिखने लगे।
निमोनिया - इसमें यूनानी दवाएं शुरू करने से पहले मरीज को विशेष तरीके से स्नान करने की सलाह दी जाती है। इसमें मरीज को पानी में पूरी तरह से स्थिर रखा जाता है, जिससे कफ निकल जाता है और अन्य लक्षण भी कम होने लगते हैं। इस तकनीक से आराम न होने पर हिप्पोक्रेट्स की किताब के अनुसार मरीज की शारीरिक तासीर, स्वास्थ्य और अन्य जांच करके दवाएं दी जाती हैं।
बीमार व्यक्ति के चारों ह्यूमर (रक्त, कफ, पीला पित्त और काला पित्त) के संतुलन को ठीक किया जाता है, जिससे अधिकतर मामलों में उनका इलाज हो जाता है। शरीर के तापमान को सामान्य रखे के लिए निम्न प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं -
सर्दी लगने पर व्यक्ति के शरीर को गर्म रखा जाता है, जिसमें पहनने के लिए गर्म कपड़े और गर्म खाद्य व पेय पदार्थ दिए जाते हैं
बुखार होने पर मरीज के शरीर को ठंडा रखा जाता है और अधिक पसीने आने पर उसके शरीर को सूखा रखने की कोशिश की जाती है
पित्तरस का संतुलन फिर से ठीक करने के लिए उन्हें मलत्यागने, पेशाब करने और उल्टी लगाने की विशेष औषधियां दी जाती हैं, जिससे उसका शरीर हल्का हो जाता है।
इतना ही नहीं मानसिक और कुछ मामलों में शारीरिक बीमारियों में संगीत और रंगमंच चिकित्सा (म्यूजिक और थिएटर थेरेपी) का इस्तेमाल भी किया जाता है। उदाहरण के रूप में यूनानी चिकित्सा प्रणाली में गाउट का इलाज करने के लिए बांसुरी और वीणा ध्वनियों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं तीव्र भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष नाटकों को दिखाया जाता है, जो एक साइकोथेरेपी के रूप में काम करता है।
Pet ki Jalan Kaise Shant Kare: अगर आप पेट की जलन से परेशान हैं, तो यूनानी मेडिसिन को अपना सकते हैं। इस पद्धति में जड़ी-बूटियों की मदद से पेट को ठंडक पहुंचायी जाती है।
Hair Fall Control Tips in Hindi: झड़ते बालों को रोकने के लिए आप महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय प्राकृतिक उपाय आजमा सकते हैं। यूनानी चिकित्सा में कुछ जड़ी-बूटियों की मदद से हेयर फॉल को कंट्रोल किया जाता है।
यूनानी में प्राकृतिक तरीकों से गठिया रोग का इलाज किया जाता है। इसमें जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है। साथ ही, जीवनशैली में बदलाव करना भी जरूरी होता है।
UTI ka ilaj Kya Hai: यूटीआई की वजह से पेशाब के दौरान तेज दर्द और जलन होने लगता है। हालांकि, नेचुरल तरीकों से यूटीआई को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आप यूनानी मेडिसिन की मदद ले सकते हैं।
Pet Dard ka ilaj: अगर आप पेट दर्द से परेशान हैं, तो यूनानी चिकित्सा अपनाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। यूनानी में प्राकृतिक तरीकों से पेट दर्द (Stomach Pain in Hindi) का इलाज किया जाता है।
Skin Problems Treatment in Unani: यूनानी मेडिसिन में त्वचा संबंधी बीमारियों का इलाज पूरी तरह से संभव है। इसमें प्राकृतिक तरीके से त्वचा को ठीक किया जाता है।
Unani Medicine for Kidney Stone in Hindi: किडनी में पथरी होने पर आप यूनानी मेडिसिन का रूख कर सकते हैं। इसमें नेचुरल तरीके से पथरी को निकालने का प्रयास किया जाता है।
How to Keep Liver Healthy in Hindi: लिवर हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसे स्वस्थ रखने के लिए खान-पान का विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है। यूनानी मेडिसिन में इस तरह से लिवर का ख्याल रखा जाता है।
Unani Medicine for Bad Cholesterol in Hindi: कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर आप यूनानी मेडिसिन का रूख कर सकते हैं। इसमें नेचुरल तरीके से कोलेस्ट्रॉल को कम करने का प्रयास किया जाता है।
मोटापा जब भी बढ़ता है तो सिर्फ पेट का ही साइज नहीं बढ़ाता बल्कि हाथों का साइज बढ़ जाता है। गर्मियों मे अक्सर महिलाएं स्लीव लेस कपड़े पहनना पसंद करती हैं। लेकिन मोटी बांह होने के कारण वो थोडा असहजता महसूस करती हैं
Unani medicine in hindi: यूनानी हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है, जिसका इस्तेमाल आज भी कई बीमारियों का इलाज करने के लिए किया जाता है। शरीर के ऐसे कई हिस्से जिनमें होने वाली बीमारियों को यूनानी तरीके से ठीक किया जा सकता है।
Published by Lakshmi Sharma | Updated : May 19, 2024, 11:57 PM
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.