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यूनानी चिकित्सा पद्धति (Unani Medicine)

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यूनानी एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसमें किसी भी रोग का इलाज करने के लिए मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को शक्तिशाली बनाया जाता है।

यूनानी चिकित्सा क्या है

यूनानी चिकित्सा एक प्राचीन उपचार प्रणाली है। एलोपैथिक ट्रीटमेंट सिस्टम के जन्म से पहले यूनानी दवाएं दुनियाभर में काफी प्रचलित थीं। हालांकि, अब भी विश्व के कई हिस्सों में यूनानी चिकित्सा को एक महत्वपूर्ण इलाज के रूप में स्थान दिया गया है। मेडिकल साइंस के विकास में भी यूनानी मेडिसिन का काफी योगदान रहा है। यूनानी चिकित्सा में आसपास की चीजों और वातावरण का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की पहचान की जाती है। बीमारियों का इलाज करने के साथ-साथ यूनानी चिकित्सा रोगों की रोकथाम करने और स्वास्थ्य में लगातार सुधार करने में भी काफी प्रभावी है। एक प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक गैलेन (Galen) ने माना था कि प्रदूषकों से होने वाली अधिकतर बीमारियां हवा से फैलती हैं और इसी कारण से वे तेजी से फैल पाती हैं। वर्तमान यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोग के मानसिक, भावनात्मक, अध्यात्मिक और शारीरिक कारणों की खोज की जाती है। उनके अनुसार ये प्रदूषक हवा के माध्यम से हमारी श्वसन प्रणाली से होते हुए शरीर के अंदर पहुंचते हैं। यूनानी शास्त्रीय ज्ञान के अनुसार रोगों की रोकथाम करने और शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने वाली दवाएं बेहद जरूरी हैं। यदि सरल भाषा में कहा जाए तो यूनानी चिकित्सा में किसी रोग का इलाज करने के लिए मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता बढ़ाने और साथ ही लक्षणों को कम करने की दवाएं भी दी जाती हैं।

यूनानी चिकित्सा का इतिहास

यूनानी चिकित्सा प्रणाली का बुनियादी ज्ञान 980 ई. में फारस में हाकिम इब्न सिना (Hakim ibn sina) द्वारा एकत्र किया गया था। हाकिन इब्न सिना को अविसेना के नाम से भी जाना जाता था। इसके बाद 1868 में भारत में जन्मे अजमल खान ने भारत में यूनानी चिकित्सा के विकास और विस्तार में अपना योगदान और यूनानी चिकित्सा में अपनी पहचान दी। यूनानी चिकित्सा प्रणाली ने ग्रीस देश में जन्म लिया था। यूनानी चिकित्सा प्रणाली हिप्पोक्रेट्स और उसके अनुयायियों द्वारा चलाई गई थी। वर्तमान भारत, पाकिस्तान, पर्शिया और कई देशों में इस उपचार प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतना ही नहीं साउथ अफ्रीका व इंगलैंड जैसे देशों में भी लोगों ने यूनानी चिकित्सा की तरफ रुख किया है।

यूनानी चिकित्सा के लाभ

यूनानी चिकित्सा प्रणाली स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रकार के लाभ प्रदान करती है और इसका उपयोग शरीर के सभी अंगों में होने वाले रोगों क इलाज करने के लिए किया जाता है। विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं में यूनानी चिकित्सा से मिलने वाले लाभ कुछ इस प्रकार हैं -

यूनानी चिकित्सा प्रणाली के सिद्धांत

ग्रीक मेडिसिन सिस्टम में स्वास्थ्य से संबंधित मुख्य सिद्धांतों का मूल्यांकन किया जाता है। इन कारकों को “अल-उमूर अल-तबियाह” के नाम से जाना जाता है, जिनका व्यक्ति के स्वास्थ्य से काफी करीबी संबंध होता है। इसीलिए, किसी व्यक्ति के रोग व उसके कारण का पता लगाने के लिए एक यूनानी चिकित्सक को इन सभी सिद्धांतों पर विचार करना पड़ता है। यूनानी चिकित्सा के मुख्य सिद्धांत कुछ इस प्रकार हैं -

यूनानी चिकित्सकों के अनुसार जब पाचन प्रणाली के किसी भी चरण में कोई खराबी या कोई भी प्रक्रिया ठीक से काम न कर पाए तो विभिन्न प्रकार के रोग विकसित होने लगते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का अपना एक अलग स्वभाव होता है, जो संभावित रूप से वास्तविक सामान्य या असामान्य हो सकता है। वास्तव में एक वास्तविक समान स्थिति कभी नहीं होती है, बल्कि यह एक सैद्धांतिक स्थिति है जिसमें चार अलग-अलग तत्व एक साथ इस्तेमाल किए जाते हैं। वहीं एक असामान मिजाज़ आमतौर पर स्वभाव के अनुचित विस्तार से होता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार आंतरिक शक्तियां शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिनकी मदद से जीवन का संतुलन बना रहता है। इनमें से कोई भी शक्ति प्रभावित होने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता है और कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या विकसित हो जाती है।

यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोग की रोकथाम

यूनानी चिकित्सा के विशेषज्ञों के अनुसार आसपास की चीजों और वातावरण का शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है, जिसके अनुसार ही हम स्वस्थ रहते हैं या बीमार पड़ जाते हैं। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के विकसित होने से पहले ही उसकी रोकथाम करने के लिए इन स्थितियों पर विचार करना जरूरी होता है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली में रोगों की रोकथाम करना भी एक मुख्य सिद्धांत है, जो छह मुख्य व आवश्यक शर्तों पर काम करता है। ये आवश्यक शर्तें न सिर्फ रोगों की रोकथाम करने के लिए होती हैं, बल्कि शारीरिक संतुलन बनाए रखने और भोजन, पानी व हवा को प्रदूषण मुक्त रखने के रूप में भी काम करती हैं। इन आवश्यक शर्तों को यूनानी चिकित्सा पद्धति में “अल-असबाब अल सिताहो अल दरुरिया” के नाम से भी जाना जाता है, जिन्हें निम्न के अनुसार समझाया जाता है -

यूनानी चिकित्सा पद्धति में रोग निदान

यूनानी चिकित्सा प्रणाली में इस्तेमाल की जा रही निदान प्रक्रिया मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम की डायग्नोस तकनीक से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। यूनानी चिकित्सा प्रणाली के अनुसार किसी भी रोग का इलाज करने, उसके लक्षणों को नियंत्रित करने या फिर उसे विकसित होने से रोकने के लिए उसका निदान करना जरूरी है। एक उचित निदान में मरीज के लक्षणों के साथ-साथ उसके स्वभाव और अन्य कोई कारकों की जांच भी की जाती है। ठीक आयुर्वेद की तरह यूनानी चिकित्सा प्रणाली भी मानव शरीर में मौजूद तत्वों के सिद्धांत पर आधारित है। यूनानी चिकित्सक रोग निदान करने के दौरान शरीर की पूरी तरह से जांच की जाती है। इस दौरान मरीज से उसके लक्षणों, स्वभाव, भावनाओं और अन्य कई प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं, जो ठीक उसी तरह काम करता है जिस प्रकार मॉडर्न मेडिसिन डायग्नोसिस के दौरान सवाल पूछे जाते हैं। यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ हिप्पोक्रेट्स द्वारा लिखी गई किताबों में रोग निदान संबंधी सभी जानकारियां दी गई हैं। इन किताबों की मदद से यूनानी चिकित्सकों को रोगों की पहचान करने, कारण का पता लगाने और उसके लिए उचित इलाज निर्धारित करने से संबंधित मार्गदर्शन मिलता है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति में इलाज

यूनानी चिकित्सा को एक महान उपचार कला और विज्ञान माना जाता है। यह उपचार शरीर के समस्त अंगों को एक समूह के रूप में नहीं बल्कि एक ही अंग के रूप में मानता है। यूनानी चिकित्सा में किसी भी रोग का इलाज शरीर, मन और प्राणों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। यूनानी चिकित्सक जड़ी-बूटियों के विशेषज्ञ होते हैं, जो हर व्यक्ति के स्वास्थ्य और रोग के अनुसार दवाएं निर्धारित करते हैं। यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार प्रकृति सबसे अच्छी उपचारक होती है। वैसे तो वर्तमान में इस प्रणाली की इलाज प्रक्रिया में काफी बदलाव हो चुके हैं, लेकिन फिर भी अधिकतर इलाज हिप्पोक्रेट्स की किताबों में दी गई जानकारियों के आधार पर ही होती हैं। इन किताबों में मुख्य रूप से निम्न उपचारों को आजतक भी इस्तेमाल में लाया जाता है -

बीमार व्यक्ति के चारों ह्यूमर (रक्त, कफ, पीला पित्त और काला पित्त) के संतुलन को ठीक किया जाता है, जिससे अधिकतर मामलों में उनका इलाज हो जाता है। शरीर के तापमान को सामान्य रखे के लिए निम्न प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं - इतना ही नहीं मानसिक और कुछ मामलों में शारीरिक बीमारियों में संगीत और रंगमंच चिकित्सा (म्यूजिक और थिएटर थेरेपी) का इस्तेमाल भी किया जाता है। उदाहरण के रूप में यूनानी चिकित्सा प्रणाली में गाउट का इलाज करने के लिए बांसुरी और वीणा ध्वनियों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं तीव्र भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए विशेष नाटकों को दिखाया जाता है, जो एक साइकोथेरेपी के रूप में काम करता है।

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